
रंगों से बढ़कर दिलों को, रंगने का संकल्प करो,
होली आई है प्रेम से, जीवन को आलोकित करो।
नफरत की ऊँची दीवारों का, आज करो विसर्जन,
द्वेष-दहन की ज्वाला में, हर वैराग्नि समर्पित करो।
फागुन की यह ज्वाला कहती, भय का त्याग करो,
ढोलक की हर थाप पुकारे, अन्याय पर प्रहार करो।
पीत-वसन में धरती बोले, स्नेह का विस्तार करो,
जिसने मन जीता जग जीता, ऐसा व्यवहार करो।
चढ़ जाए रंग जो हृदय पर,उसे अमिट आधार करो,
सच्चे मिलन की डोर से, रिश्तों को साकार करो।
अबीर उड़ा कर नभ तक, मानवता को साकार करो,
होली के पावन उत्सव में, प्रेम का ही प्रचार करो।
‘दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’ कहें, मन में उजियारा भरो,
रंगों से बढ़कर प्रेम जगाओ,जीवन को धन्य करो।
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




