साहित्य

राम किशोर वर्मा

वसंत पंचमी

अब मौसम बसंत का आया ।
पृथ्वी ने श्रंगार कराया ।।१।।
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सरसों की चादर पीली-सी ।
जो देखे वह ही हर्षाया ।।२।।
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कलियां भी अब चटक रही हैं ।
भँवरों का दल भी मँडराया ।।३।।
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पीले पत्ते जो टूटे थे ।
नव कोपल ने उन्हें भुलाया ।।४।।
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महक बहुत अद्भुत-सी आती ।
आम्र बौर लगता बौराया ।।५।।
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अंत शीत का करने को ही ।
उतरायण ने सूर्य बुलाया ।।६।।
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फूल खिले हैं डाली-डाली ।
तितली का भी मन ललचाया ।।७।।
-राम किशोर वर्मा
रामपुर (उ०प्र०)
दिनांक:- २३-०१-२०२६ शुक्रवार

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