साहित्य

सच के साथ चलिए

मधु वशिष्ठ

सच के साथ चलिए एक दिन वक्त आपके साथ चलेगा।
आज भले ही होगी तुम्हें मुश्किल लेकिन आगे का जीवन शांति से कटेगा।
लेकर झूठ का साथ माना तू एक बार तो खूब बढ़ेगा।
सबकी नजरों में भी तू ही चढेगा।
लेकिन जब खुल जाएगी झूठ की पोल
सोच तू तब कितनों की नजरों से गिरेगा।
विश्वास तुझ पर कोई ना करेगा,
पतंग के गर्त में जरूर ही गिरेगा‌।
जीवन में सच को अपनाना।
दिखावा न करना,
ना बहकना खुद ना ही औरों को बहकाना।
लेकर सच का आसरा अपने मनोबल को मजबूत बनाना।
जीवन के हर क्षेत्र में सच्चाई के रास्ते पर चलकर स्वयं को बहुत आगे बढ़ाना।

मधु वशिष्ठ, फरीदाबाद, हरियाणा।

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