साहित्य

पर्यावरण बचाओ

डॉ ऋतु अग्रवाल

त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ।
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ।।

पोखर सागर सब नद-नाले,बने हुए विष धारा।
सूरज आतप तपन धौंकनी, बढ़ा ताप का पारा।।
धूँ- धूँ कर जंगल जलते हैं,कारण कौन बताओ।
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ।।

धूल-धूसरित राहें देखो,जमी हुई है गारी।
कंकरीट के महल खड़े हैं, ऊँचे भवन अटारी।।
नई साज-सज्जा के मद में, वृक्ष नहीं कटवाओ।
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ।

खेत रसायन खाद अटी है,भोजन दूषित कितना।
सब्जी और फलों को रँगता, गिरा गर्त मनु इतना।।
मौन तोडकर आगे बढ़कर,मुखर गुहार लगाओ।
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ।।

डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश

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