साहित्य

तिथि और अतिथि

कमल पटेल चकरावदा

 


तिथि और अतिथि दोनों का,
आओ करें मिलकर स्वागत।
तिथि है हमारे घर का गौरव,
और ये अतिथि अभ्यागत।।

तिथि हमारे भाल का चंदन,
करो अतिथि को भी वंदन।
मान्यताओं को करो स्वीकार,
इनका भी करो अभिनंदन।।

माना! अतिथि देवता समान,
पर तिथि हमारी है भगवान।
सम्मान स्वागत आगंतुक का,
नहीं घटाना तिथि का मान।।

दिनांक दिनचर्या में शामिल,
तिथि सनातन ज्ञान है सारा।
ईस्वी सन् पश्चिमी मान्यता,
संवत है स्वाभिमान हमारा।।

ना किसी से वेर रखते हम,
ना ही रखते हम अदावत।
सन् संवत जीवन के अंग,
दोनों का ही प्रेम से स्वागत।।

कमल पटेल चकरावदा ✍️

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