
सावधान सवर्ण समाज, समय पुकार रहा है,
हर प्रतिभाशाली बालक आज सवाल कर रहा है।
मेहनत, मेधा, परिश्रम की जब क़ीमत न बचे,
तो राष्ट्र का भविष्य भी अंधेरों में सिमटे।
यह युद्ध नहीं है रक्त और बारूद का,
यह संग्राम है नीति, नियम और अस्तित्व का।
जहाँ अंक नहीं, पहचान बाँटी जाती है,
वहाँ प्रतिभा हर रोज़ मारी जाती है।
ब्राह्मण का ज्ञान जब उपेक्षित होगा,
क्षत्रिय का स्वाभिमान जब अपमानित होगा।
वैश्य का श्रम जब अनदेखा कर दिया जाएगा,
तो राष्ट्र कैसे विश्वगुरु बन पाएगा?
उठो, संगठित हो, पर मर्यादा न टूटे,
संघर्ष हो प्रखर, पर संविधान न छूटे।
हम माँग नहीं रहे किसी का हक़ छीनकर,
हम चाह रहे हैं न्याय, समानता लेकर।
फुव्वारा चौक साक्षी बने इस हुंकार का,
यह स्वर नहीं, यह प्रण है अधिकार का।
आज जो खड़ा होगा सत्य के साथ,
वही लिखेगा कल का उज्ज्वल इतिहास।
याद रखो—
एकता में शक्ति है, यह नारा नहीं सत्य है,
बच्चों का भविष्य ही हमारा सबसे बड़ा दायित्व है।
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




