राज्यसाहित्य

मेरी डायरी में, मैं खुश हूँ

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

मेरी डायरी में मैं खुश हूँ कि मेरा
जीवनसाथी ज़ोरदार खर्राटे लेता है,
परन्तु वह मेरे पास है क्योंकि हम
दोनों पर हमारे ईश्वर मेहरबान है।

मैं खुश हूँ कि मेरे बेटा बेटी सुबह
सबेरे इस बात पर झगड़ा करते हैं,
कि रात भर मच्छर सोने नहीं देते हैं,
यानी वह सभी हमारे साथ रहते हैं।

मैं खुश हूँ कि हर महीना बिजली,
गैस, पेट्रोल, डीजल आदि सबके
भी अच्छे खासे टैक्स देने पड़ते हैं,
पर ये सब चीजें भी हमारे पास हैं।

मैं खुश हूँ कि शाम होने तक मेरा
थकावट से बुरा हाल हो जाता है,
यानी मुझमें दिन भर सख़्त काम
करने की ताक़त और हिम्मत है।

मैं खुश हूँ कि हर रोज अपने घर
को साफ करना पड़ता है, शुक्र है,
मेरे पास घर है, जिनके पास छत
ही नहीं, उनका क्या हाल होता है।

मैं खुश हूँ कि हम दोनों को एक साथ
महीने भर की दवाइयाँ लानी पड़ती हैं,
पर ईश्वर का शुक्र है कि हम दोनों
ही ज़्यादातर सेहतमंद तो रहते हैं।

मैं खुश हूँ कि हर साल शादी आदि
में लिफ़ाफ़े देने में जेब खर्च होता है,
यानी मेरे पास अजीज चाहने वाले,
मेरे रिश्तेदार, दोस्त भी अपने हैं।

मैं खुश हूँ कि हर रोज अलार्म
की आवाज़ पर हम उठ जाते हैं,
यानी हर रोज़, हम एक नित नई
सुबह भी नसीब से देख पाते हैं।

अपनी व अपने लोगों की ज़िंदगी,
छोटी या बड़ी परेशानियों में भी,
हर दम ऐसे ही सुकून भरी बनायें,
जीवन के इस सूत्र पर अमल करें।

खुशियों की तलाश अवश्य करें,
हर हाल में ईश्वर का शुक्रिया करें,
आदित्य जिंदगी खुशगवार बनाएं,
स्वयं को व औरों को भी खुश रखें।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

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