
आखिरी सांसो के जैसा है, ये आखिरी पन्ना
जीवन के कटु अनुभवों से, भर दिया है हर पन्ना
आखिरी सांसो …….
बचपन की शुरूआत थी, पानी में नाव चलाने से
कभी पतंग तो कभी जहाज, बनाकर उसे उड़ानें से
मगर अब भरा हुआ है, यादों से हर एक पन्ना
आखिरी सांसो……..
तुम्हारे मिलने से लेकर, बिछुडने तक
रोज़ी – रोटी – रोजगार से, लड़ने तक
जीवन के संघर्षों से, भरा है ये पन्ना
आखिरी सांसों ….
मेरे बाद खोलकर पढ़ना वो, आखिरी पन्ना
मेरी डायरी में लिखा मिलेगा, बस वही पन्ना
मेरे जीवन का निचोड़ होगा, वो आखिरी पन्ना
आखिरी सांसों ……..
अब कोई पन्ना ना, तुमको पलटना होगा
अब ना कुछ तुम्हें, देर तक कुछ ढूंढना होगा
आखिरी पन्ना के बाद ,कोई छोड़ा ही नहीं पन्ना
आखिरी सांसों….
मेरी खुशी मेरे गमों की, वो ही गवाही देगा
मेरे बाद मेरे गुनाहों की, वो सफाई देगा
स्वयं बोलेगा वो ,जब तुम पढ़ोगी वो आखिरी पन्ना
आखिरी सांसों……..
बहुत कठिन होता है, लिखना आखिरी पन्ना
हर शख्स कहां पढ़ पाता है,वो आखिरी पन्ना
पढ़ सको तो पढ़ लेना, ‘सागर’ का लिखा हर पन्ना
…….
बेख़ौफ़ शायर डा.नरेश सागर




