
तेरा वैभव अमर रहे माँ,
हम दिन चार रहें न रहें,
तेरी सीमा पर जो अडिग खड़े हैं,
वे सपूत रहें न रहें।
तिरंगे की छाया ओढ़े
जिनकी साँसों में देश बसा,
हंसकर प्राण चढ़ा देने का
जिन्होंने व्रत मौन रचा।
घर-आँगन, नींदें, त्यौहार
पीछे छोड़ चले वीर जवान,
माँ की आन पर आँच न आए
बस यही उनका है अरमान।
गोली, बर्फ़, अँधेरा, तूफ़ान
उनके पथ को रोक न पाए,
भारत माँ की रक्षा में
हर संकट उनसे हार जाए।
आज यह मंच नमन करता है
उन बलिदानी प्रहरी को,
जिनकी वजह से सुरक्षित है
हर घर, हर बच्चा, हर रोशनी को।
तेरा वैभव अमर रहे माँ,
सैनिकों का यश गाता रहे,
हम रहें न रहें इस धरती पर,
भारत सदा विजयी कहलाता रहे।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश



