साहित्य

ये सीमा के रखवाले, मेरा देश बचाने वाले

कुलदीप सिंह रुहेला

ये सीमा के रखवाले, मेरा देश बचाने वाले,
माटी की सौगंध लिए, सरहद पर डट जाने वाले।
सर्द हवा, तपता सूरज, जिनसे डरकर भागे,
ऐसे वीर जवान हमारे, दुश्मन से न घबराने वाले।

माँ की ममता आँखों में, भारत माँ बसती है,
छाती पर तिरंगा सजा, हर साँस में गूँजती है।
नींद छोड़ कर जागे हैं, हम सबको सुलाने वाले,
अपने हिस्से का सुकून, देश पे लुटाने वाले।

बर्फ़ीली चोटियों पर, या रेगिस्तान की धूल में,
हर मौसम को मात दे, खड़े रहते उस मूल में।
गोलियों की गूंज में भी, हँसकर गीत सुनाने वाले,
मौत से आँख मिलाकर, वतन को मुस्काने वाले।

कलम चले या खेत खिले, चैन से हम जी पाएँ,
इसलिए ही सरहद पर, वो अपने दीप जलाएँ।
रक्त नहीं वो स्याही है, जो इतिहास लिख जाए,
इन वीरों की गाथा से, हर भारतवासी गाए।

नमन तुम्हें हे प्रहरी, भारत के शान हो तुम,
ये देश सुरक्षित है, जब तक जवान हो तुम।
गूँज उठे हर गली-चौराहा, हर एक स्वर बोले,
ये सीमा के रखवाले, मेरा देश बचाने वाले।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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