साहित्य

बगीचे की सैर

सत्येन्द्र कुमार पाठक

धूप खिली थी बड़ी सुहानी, बगीचे में चली कहानी।
डुग्गु भैया दौड़ के आए, संग में नन्हा पुच्चू लाए।
आम, महुआ और अमरूद के पेड़, छाँव घनी थी, ठंडी ढेर।
तभी डाल पर तोता बोला, “मिट्ठू-मिट्ठू” का रस घोला।
मैना रानी पास में आई, मीठा सा एक गाना गाई।
छम-छम नाचे मोर सुहाना, देख के पुच्चू हुआ दीवाना!
तभी वहाँ एक गदहा आया, ढेंचू-ढेंचू शोर मचाया।
पीछे-पीछे घोड़ा धागा, टिक-टिक, टिक-टिक करके भागा।
धम-धम करता हाथी आया, लंबी सूँड़ को खूब हिलाया।
डुग्गु, पुच्चू हँसे मजे में, हाथी दादा सजे-धजे थे।
सबने मिलकर खेल रचाया, बगीचे में बड़ा मजा आया!
सत्येन्द्र कुमार पाठक
करपी , अरवल , बिहार 804419
9472987491

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