
जाने कौन से सफ़र का
कौन मुसाफ़िर होगा,
कौन होगा यहाँ नाकाम,
और कौन सफलता में शामिल होगा।
अगर लड़ेंगे हम हर मुश्किल से,
तो हर शख़्स यहाँ काबिल होगा।
एकल गति में दम कहाँ होता है,
कोई किसी से कम नहीं होता है।
है ताक़त सबमें फतह करने की,
पर केवल ठान लेने से कुछ नहीं होता है।
कड़ी परिश्रम से ही नदी
पहाड़ों को चीर निकलती है।
मीलों की यात्रा तय करती हुई,
अंत में समुद्र से जा मिलती है।
उन रास्तों के जीवों को जीवन देती,
जिस राह से होकर वह निकलती है।
मानव जीवन भी कुछ ऐसा ही है,
यह जीवन एक मेले जैसा है।
हमें अच्छाइयाँ अपनानी हैं,
और बुराइयाँ दूर भगानी हैं।
जीवन का मक़सद हमें समझना है,
कि हर किसी को एक दिन
चिता में जल जाना है।
किसी को दुख न पहुँचाने का
स्वयं से वादा करो,
और यह कविता सच्ची है—
इसे आगे भी साझा करो।
*अनामिका श्रीवास्तव*




