साहित्य

बसंत का संगीत

प्रिया कम्बोज प्रिया 

कितना सुहाना मौसम आया
मुरझाए दरख्त फिर लहराया

धरा ने ओढ़ी धानी चुनर
विधाता ने रंगा केसरिया अम्बर

भंवरों की कूंजन वन उपवन
मधुर गीत गाती कोयल हो मगन

पीले फूलों से खेत सरसों के लहराएं
देख सुंदर रूप प्रकृति मन हर्षाएं

ऋतुओं में राजा बसंत बहार
बरस में होते मौसम चार

बसंत मौसम जब आएं द्वारें पंछी उन्मुक्त हो मन हारे

कुसुम झूम मनमीत बनाएं
ऋतु बसंत जब संगीत सुनाएं

प्रिया कम्बोज प्रिया
स्वरचित रचना
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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