साहित्य

तीन रंगा रो तिरंगा प्यारो प्यारो लागे

लखन लाल माहेश्वरी

तीन रंगा रो तिरंगा प्यारो प्यारो लागे
माने प्यारो प्यारो लागे
तिरंगा हमारी शान है
जिसमें अशोक चक्र प्यारो प्यारो लागे।
तीन रंगा रो,,,,,
तीन रंगा रो तिरंगो प्यारो
बीच में है चक्कर प्यारो प्यारो
भारत का गणतंत्र दिवस पर
घर घर तिरंगा फहरा तो प्यारो प्यारो लागे ।।
तीन रंगा रो,,,,,,,
आजादी के गणतंत्रदिवस पर
भारत को आगे बढ़ानो है
हर क्षेत्र का विकास कर
भारत की शान बढ़ानी है।।
तीन रंगा रो,,,,,,,,
गणतंत्र के इण दिवस पर
हमें राष्ट्र प्रेम बढ़तो है
पिछड़ो को आगे बढ़ाकर
सनातन धर्म को बढ़ानो है। ।
तीन रंगा रो,,,,,,,
आज आजादी को गणतंत्र दिवस है
दुनिया में भारत को विश्व गुरु बनाना है
प्रेम लखन कहे हमारे तिरंगे की
हम सबको लाज बचानी है।
तीन रंगा रो,,,,,,,

लखन लाल माहेश्वरी पूर्व व्याख्याता अजमेर राजस्थान

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