साहित्य

धड़कन

सुषमा श्रीवास्तव

दिल की धड़कन ही तो है जो नित सारे एहसास कराती है,
जीवन जीने का पल-पल एहसास जगाती है।
नित्य ही यह अपनों से मुलाकात कराती है,
इस हसीन दुनिया के हर फलक से रूबरू कराती है।
है क्या कोई दूजा ,जो धड़कन के बिना जीवन के कुछ अकिंचन से भी रंग दिखा सके?
नहीं न! तो कोई कैसे कर सकता है इसकी हैसियत से बराबरी?
सारे संबंध,भाव-अनुभाव, कर्मों का नाता भी है इसी धड़कन से।
दिल में जब तक ये धड़कन है जीवन में एक आस है, विश्वास है,
अपनी मंजिल को पाने की चाह है।
अपने कदमों को आगे बढ़ाने का उत्साह है।
दिल की इस धड़कन को धड़कने दो,
अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख अपने जीवन को फूलों सा महकने दो।
है नहीं इस दिल को धड़काना अपने वश में,
जिसने रची अनुपमेय सृष्टि,
दी काया औ फूँकी जान, वही तो है हमारी धड़कन का जादूगर।
उसका ही है पल-पल नमन वंदन औ सुमिरन।।

सुषमा श्रीवास्तव,रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर,उत्तराखंड।

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