
वो रात खुशियों भरी सौगात थी
जब..,
मन के अंतस में दीप जले ,
और मिला साथ तुम्हारा मुझे
जीवन-साथी बन साथ निभाने का,
साथ हमारा सदा रहे
छूटे ना हाथ कभी पल को,
कष्टों में सीखा जीना मैंने
कैसे बीते ये दिन रैना,
याद नहीं है ये मुझको
बस, साथ हमारा बना रहे,
जीवन-साथी बन साथ निभाने का,
जीवन-साथी बन साथ निभाने का ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब



