
सब्र दिल का आज़माना ठीक है क्या
इश्क़ में दिल को जलाना ठीक है क्या
कब तलक तड़पाओगे हमको बताओ
ये न मिलने का बहाना ठीक है क्या
इस तरह मुझको पराया मत करो तुम
राजदां से ग़म छुपाना ठीक है क्या
हो गए हैं आज सब दिल फेंक आशिक
हर किसी पर दिल लुटाना ठीक है क्या
सब निकालेंगे यहाँ कुछ और मतलब
बे ज़रूरत मुस्कुराना ठीक है क्या
मैकशी की इसको तौहीनी कहेंगे
ऐसे पी कर लड़खड़ाना ठीक है क्या
मीम क़ीमत वक़्त की समझो ज़रा तुम
इसको ऐसे ही गँवाना ठीक है क्या
फ़ैज़ अहमद मीम
आरा बिहार




