
नाम ले के मुझे वो बुलाने लगे
इस तरह दिल में वो अब समाने लगे // 1
कहकशाँ नूर है चाँदनी रात का
आसमां में सितारे सजाने लगे // 2
पास बैठो तबीयत बहल जायगी
आप क्यूँ इस क़दर से शर्माने लगे//3
खोन जाए कहीं ये हंसी रात यूँ
आप तो शोखियाँ अब दिखाने लगे//4
वस्ल की रात है और जज्बात है
आ भि जाओ कि अब हम मनाने लगे//5
मंजुला शरण “मनु”
राँची,झारखण्ड़।




