साहित्य

गज़ल

मंजुला शरण "मनु"

नाम ले के मुझे वो बुलाने लगे
इस तरह दिल में वो अब समाने लगे // 1

कहकशाँ नूर है चाँदनी रात का
आसमां में सितारे सजाने लगे // 2

पास बैठो तबीयत बहल जायगी
आप क्यूँ इस क़दर से शर्माने लगे//3

खोन जाए कहीं ये हंसी रात यूँ
आप तो शोखियाँ अब दिखाने लगे//4

वस्ल की रात है और जज्बात है
आ भि जाओ कि अब हम मनाने लगे//5

मंजुला शरण “मनु”
राँची,झारखण्ड़।

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