
गिरा दो नफ़रत की दीवारें,अब फैलाओ प्यार
आया होली का त्यौहार….
हवा बसन्ती बहने लगी है
कानों में यह कहने लगी है
बौरों से लद गयी है देखो,यह अमुवा की डार
आया…..
पीली सरसों फूल उठी है
कली-कली भी झूम उठी है
रंग-बिरंगी तितली उड़तीं ,अपने पंख पसार
आया…..
फूल रहे हैं गेंदा,गुड़हल
मन में नयी२सी हलचल
आमों के पत्तों में छिपकर ,कोयल रही पुकार
आया….
होली की रंगोली सज गयी
हुरियारों की टोली सज गयी
पिचकारी ले बच्चे कर रहे,रंगों की बौछार
आया….
कहीं भंग पत्थर पे घुटती
कहीं गुझिया खूब महकती
नये – नये परिधान पहन सब,हो जाते तैयार
आया…..
आशा बिसारिया चंदौसी




