
जीवन के इस काल खंड में
मैंने…,
आज के दिन इस देश में..,
इतिहास को बनते देखा,
एक बार नहीं-दो बार को बनते देखा ,
पहली बार बना जब -तब
तिथि पांचऔर अगस्त महीना
और -साल ,दो हजार उन्नीस का था ,
उस दिन आजाद हुआ था एक राज्य
नाम था जिसका -जम्मू और काश्मीर ,
सात दशक के क़ानून से
नाम था जिसका -धारा 370,
और उदय हुआ दो नये राज्य का
एक बना जम्मू-काश्मीर
और –दूसरा लद्दाख ,
आज के दिन इस देश में
इतिहास को बनते देखा ||
इतिहास ने पुनः दुहराया है
अपने आपको…,
आज के दिन फिर से एक बार
तिथि पांचऔर अगस्त महीना
और साल ,दो हजार बीस का है ,
टूट गया भ्रम लोगों का -और
स्वप्न हुआ साकार राम मंदिर का ,
जो धक्के खाता रहा इधर से उधर
छोटी -बड़ीअदालतों में पांच शताब्दियों से ,
लोगों की कुर्बानी और शहादत हुई आज साकार,
स्वप्न सरीखा -सपना ,आज हुआ साकार
भूमिपूजन हुआ वहीं पर -जहाँ
राम का जन्म हुआ था
और -गर्भ गृह नाम था उसका ,
आज के दिन इस देश में
इतिहास को बनते देखा ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब




