साहित्य

जय मां हंसवाहिनी

आशा बिसारिया

चली वासंती बयार,छेड़ा माँ ने सितार
धरती अंबर में गूँजे ,सुरों की झंकार
चली….
हंसती है धरती , नव पल्लव पाए
फूलों के प्यारे-प्यारे ,गहने सजाए
बागों में है नयी बहार,
भंवरे करते हैं गुंजार
धरती…….
सरसों भी फूली , गेंदा भी फूले
महके गुलाब औ’ टेसू भी फूले
तितली उड़ती पंख पसार,
मधुऋतु आई कर श्रृंगार
धरती……
श्वेत वसन माँ,हुईं पीत वसना
अनुपम श्रृंगार देखें,मेरे नयना
करदो अपनी कृपा अपार
शीश झुकाए यह संसार
धरती…..
शंकर का डमरू डम-डम डोले
गौरा की पायल छम-छम बोले
कोयल करती है पुकार
गीत सुनावे बारम्बार,
आशा बिसारिया चंदौसी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!