
खाटू मोहन ने क्या शान अजब पाई है
हाँ पाई है ।
प्यारे मोहन ने क्या शान अजब पाई है ।
हर जगह आप की ताकत ही नज़र आई है
नजर आई है ।
ऐसा लगता है किस्मत है चमकने वाली ।
मुझको तेरी रहमत तेरी दहलीज पे
ले आयी है ले आयी है ।
मेरे प्रभु छोड़ तुझे आज कहाँ जाएंगे ।
तेरी किरपा ही यहाँ पे
खींच लाई है हाँ लायी है
खाटू दरबार मुझे लगता है
काशी मथुरा ।
तेरी दुनिया ही हर ओर नजर आयी है आयी है
मेरे प्रभु मोर मुकुट वाले सुन
तुझपे मिटने की कसम खायी है हाँ खाई है ।
तेरा जलवा है प्रभू अब तो
बिखरने वाला ।
मुझको तेरी सिमरन तेरे दरबार मे
ले आयी है ,ले आयी है ।
तुम हो हारे के सहारे मेरे खाटू प्यारे ।
तेरे प्यार बिना लौटा तो यहाँ से
तेरी रुसवाई है तेरी रुसवाई है ।
सुषमा दीक्षित शुक्ला




