
माॅं लगा ली आस तेरी ज्योति की दरबार में।
छलकते आंसू बहाए माॅं तुम्हारे प्यार में।
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रूप है तेरा सुहाना भक्त दर्शन कर रहे,
लाल चुनरी ओढ़ कर माॅं आ गई परिवार में।
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दंश संशय चुभ रहे माॅं द्वार तेरे आस है,
शंखनाद सु गूंजता हर ओर ही संसार में।
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माॅं हरो पीड़ा सभी का नाश दुष्टों का करो,
सब रहें सुख से यहाॅं माॅं प्रेम हो व्यवहार में।
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सुमन माॅं कब से खड़ी अब शरण में माॅं लीजिए,
माॅं कृपा अब कीजिए है शुभ सदा उपचार में।
डॉ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार



