
पैसे के बल पर साहित्यकार नहीं बनती हूं।
अपनी लेखनी से अपनी पहचान रखती हूं।
अपने भावों और विचारों को खुद ही गढ़ती हूं।
लेकर कागज़ और कलम शब्दों में पिरो देती हूं।
देवरिया की बेटी हूं,गोरखपुर में रहती हूं।
बंदना मेरा नाम है,सबका अभिनंदन करती हूं।
गीत, गज़ल, कविता को बांध कर नहीं रखती हूं।
जब भी मिले फुरसत साहित्य सृजन कर लेती हूं।
अपनत्व से जो जुड़ना चाहे उसी से केवल जुड़ती हूं।
भीड़ का हिस्सा नहीं लेखनी से पहचान रखती हूं।
अपने आत्म सम्मान का भी मै ख्याल रखती हूं।
अपनी बात बेबाक सबके सामने रख देती हूं।
है धैर्य तो बहुत मेरे अंदर धैर्य बहुत ही मै रखती हूं।
झूठ बर्दास्त नहीं सच के साथ अडिग खड़ी रहती हूं।
गलत को गलत और सही को सही कह लेती हूं।
भारत की बेटी हूं, मै इतना तो जिगरा रखती हूं।
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बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश




