
मिलकर सभी स्वस्थ समाज का आओ निर्माण करें।
दीन-हीन जो वंचित जन हैं उनका कल्याण करें।।
जो समाज में व्याप्त बुराई, उसको आज मिटाएँ।
सुंदर स्वस्थ समाज बनाकर, नूतन भाव जगाएँ।।
जातिवाद और संप्रदाय का, इसमें जहर घुला है।
मलिन हो गया अति समाज यह, बिल्कुल नहीं धुला है।।
ऊंँच-नीच अरु भेदभाव का, दानव आज भगाएंँ।
प्रेम और समता का उपवन, मिलकर आज सजाएँ।।
राग द्वेष का पनप रहा तरु, आओ उसको काटें।
बुराइयों की जो खाईं है, आओ मिलकर पाटें।।
समुचित शिक्षा उचित चिकित्सा, सबको आज दिलाएँ।
एक बार फिर शुचि समाज को,फूलों सा महकाएंँ।।
गौरवमय अपना समाज हो, कही न किंचित भय हो।
इक दूजे से गले मिले तब, जनमानस सुखमय हो।।
सबके घर में शुभ दीप जलें, कहीं न अंँधियारा हो।
प्रेम और सद्भभाव भरें तो, दीपित जग सारा हो।।
सुंदर परिवेश अखंडित हो,ऐसा देश बनाएंँ।
आओ हम सब मानवता का, पावन दीप जलाएंँ।।
देश समाज हमारा तब ही, नित उत्थान करेगा।
विश्व पटल पर जब भारत का, शुभ झंडा फहरेगा।।
डॉ गीता पांडे अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश



