साहित्य

मिट्टी की खुशबू

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

मिट्टी की खुशबू में बसा,
जीवन का सारा संसार।
मिट्टी से जन्मे हम सब,
मिट्टी में ही विश्राम-सार।

मिट्टी माँ की ममता है,
धैर्य, सहन का रूप वही।
सूखी लगती बाहर से,
भीतर जीवन-धूप वही।

मिट्टी की कोख में पलते,
बीज बने आशा-स्वप्न।
अन्न बनें, जीवन बनें,
करते जग का पोषण सतत।

मिट्टी रचती पर्वत-नदियाँ,
वन, उपवन, हरियाली।
कण-कण में सृष्टि धड़कती,
मिट्टी ही जग की रखवाली।

सोना, चाँदी, हीरा-लौह,
खनिज सभी इसमें वास।
मिट्टी देती सबको कुछ,
बिन बोले, बिन किसी आस।

मिट्टी से उठकर मेघ बनें,
बरसें फिर धरती माँ।
चक्र यही जीवन का है,
समझे इसे हर एक प्राणी यहाँ।

मिट्टी की सच्ची खुशबू में,
संस्कारों की पहचान।
जो मिट्टी को पूजे मन से,
उसका उज्ज्वल हो अभियान।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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