
हे आदि शक्ति सिंह वाहिनी,
दीप सुगंध दिव्य दायिनी।
दिवस तृतीय रूप तुम चंद्रघंटा,
हो शक्ति का स्वरूप तुम।
अर्धचन्द्र माथे पर सजता,
रूप माँ का सुंदर लगता।
गदा त्रिशूल धनुष कर धारे,
रूप तीसरा शेर सवारी।
स्वर्ण के समान सुनहरी काया ,
सैकड़ों सूर्य के समान तेज पाया।
शांतिकारक, कल्याणकारी माता,
पूजा कर कर्ज भय मुक्त मानव हो जाता।
महिषासुर ने आतंक मचाया,
स्वर्ग लोक सारा थर्राया ।
देव गणों ने तुमको ध्याया,
दुष्ट को तुमने मार गिराया।
श्वेत कमल प्रिय माँ को,
प्रिय पीले गुलाब की माला।
हो लाल स्वच्छ वस्त्र धारिणी
असीम सकल जगत तारिणी।
आदि शक्ति हे!मातु भवानी,
करो कृपा हम पर कल्यानी।
पूजा अर्चन हम सब करते,
प्रेम भक्ति की ताकत भरते।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




