
पोते ने पूछा दादा जी ,
क्यों सब ऐसा मानें?
कहें मोर के नाच को यहाँ
मुर्गी कैसे जाने?
दादा बोले, अज्ञानी को
ज्ञान नहीं है आता,
मूल्य,कला जैसी वस्तु को
समझ नहीं वह पाता।
इसीलिए कहते हैं सारे,
दे दे सुंदर ताने,
किसी मोर के नाच को यहाँ
मुर्गी कैसे जाने।
मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो ०-8433013409
दिनांक- 5-2-2026




