
हरी भरी यह धरती अपनी प्राणों का आधार है
पेड़ पौधे और नदियां प्रकृति का श्रृंगार है।
नीला अंबर शुद्ध हवा सब ईश्वर का है वरदान,
इसे बचाए रखना है ही तो मानवता की है पहचान।
मत काटो तुम इन पेड़ों को देते जीवन हमें ये,
इनके बिना अधूरा होगा जग का कोना-कोना ये।
दूर भगाओ प्लास्टिक को दीप जलाओ स्वच्छता का,
धरती मां का संकट मिटाने की आओ करे व्यवस्था।
हर बच्चा एक वृक्ष लगाये धरा होए फिर से खुशहाल,
खुशहाली की लहर चले मस्त होए प्रकृति की चाल।
पर्यावरण सुरक्षित होगा तभी सुरक्षित हम होंगे,
प्रकृति से नाता जोड़ तभीखुशी से सब जिएंगे।
संकल्प करो तुम आज यही हरियाली हम फैलाएंगे,
प्रदूषण को दूर भगाकर धरती स्वर्ग बनाएंगे।
स्वच्छ रहे यह “आकाश” हमारा यही संदेश भेजना है,
सांसों की इस पूंजी को मिलकर हमें सहेजना है।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




