
यहां गधे , वहां भी गधे
गधों का लगा हुआ मेला।
कुछ गधे बिना सधे हुये
कुछ बने किसी का चेला।।
पढे लिखे कुछ गधे हैं
कुछ गधे कोरे नकली।
कुछ गधे आवारा घूमते
कुछ गधे केवल शक्ली।।
कुछ गधे रेंकते में माहिर
बेहुदा बकवास फेंकते हैं।
कुछ गधे बस बैठे रहते
कुछ दोपहरी धूप सेंकते हैं।।
कुछ गधे निठल्ले रहते
पास में नहीं उनके पल्ले।
बैठकर बस चले जाते हैं
चापलूसी के बने हैं दल्ले।।
कुछ गधे किताबी कीड़े
तनख्वाह चिपकू हिसाबी।
महीने भर में मालामाल
शराबी,कबाबी, शबाबी।।
कुछ गधे राख लोटपोट
परस्पर दिखाते हैं खोट।
कुछ होंची होंची करते
पैदा हुये खाने को रोट।।
कुछ गधे सफारी सवारी
बाकी गधे लाचारी रहते।
हर साल गाड़ी बदलते
अफीम पिनक मस्त बहते।।
अंग्रेजीभक्त कुछ गधे
कुछ हिंदी बोलते हैं।
निज हैसियत चोरों सी
कुछ सैर को दौड़ते हैं।।
कुछ गधे उच्च शिक्षित
कुछ नकली डिग्री लिये।
कुछ भूखों मर रहे हैं
कुछ महंगे ब्रांड पिये।।
कुछ गधे कोट पेंट में
कुछ गधे चकाचक हैं।
कुछ गधे बड़बोले से हैं
कुछ गधे झकाझक हैं।।
कुछ गधे केवल गधे हैं
खाते सूखा घासफूस।
तनख्वाह जैट गति की
परम प्रवीण मक्खीचूस।।
कुछ गधे चरसी हैं
नौटंकी में पक्के धूर्त।
पल माशा पल तोला
भोजनभट्ट से स्वस्फूर्त।।
कुछ गधे विदेशी दौरे
कुछ गधे घरों में बंद।
कुछ गधे अंग्रेजी बोलें
कुछ गधे स्वदेशी पसंद।।
कुरड़ी मस्त कुछ गधे
कुछ गधे कुर्सी पर बैठे।
सब कुछ मैंने पढ लिया
गर्दन सरिया डाले ऐंठे।।
गधापच्चीसी लगी हुई
तीन नौके करते बीस।
कुछ गधे मौनव्रत बैठे
कहीं से मिले बख्शीश।।
असली गधे रेंक रहे हैं
नकली गधे माल मस्त।
बिना किये मिल जाता है
जून,जुलाई,सुनो अगस्त।।
गधा योनि बदनाम हो गई
पढे -लिखे गधों का रेला।
गधा बना न जो सिस्टम में
दुखी बेचारा वह अकेला।।
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डॉ शीलक राम आचार्य
वैदिक योगशाला




