
पूर्वी – पलनिया में
दिनवा बीतावत बानी राजा जी पलनिया में,
फागुन बीतल जाता, आइब चइती कटनिया में,,,,।
अंँखिया में लोर बा त नैना में प्यार बा
सबका से दुर्दिन ना, दिनवा हमार बा
लोटवा के पनिया लिहले रहब हम दलनिया में ,,,,।
आमवा के बगिया में कोइली के गीतिया
सुधिया में बोरल रही हमनी के प्रीतिया
अलगे हरसाई मनवा चइती किरिनिया में,,,।
जेतने पिरितिया बा ओतने बियोग बा
फागुन बीतेला त बस चइते संजोग बा
बेदना सताई नाहीं कबो ई जवनिया में,,,,।
विद्या शंकर विद्यार्थी रामगढ़, झारखंड




