
है प्रभु तेरी अद्भुत माया,
कहीं धूप, कहीं है छाया।
कण कण में ब्रह्मांड समाया,
दिया मानव को तुने कंचन काया।
कुछ मानव ने दुरूपयोग कर,
दुष्टबुद्धि कर अत्याचार बढ़ाया।
कोरोना से भी देश भर में,
प्रलय का आतंक गहराया।
होते हैं अत्याचार निर्बल पर,
यह देख मेरा जी घबराया।
सत्य, अहिंसा और मानवता हुआ गुम,
अधर्म का परचम फहराया।
उद्धार करो प्रभु जन जन का,
तेरी सृष्टि रूपी पुष्प मुरझाया।
है प्रभु सब है तेरी ही माया,
कहीं है धूप तो कहीं है छाया।
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ममता झा
डालटेनगंज



