
प्रभु तेरी गोद में
प्रभु से अंतिम विनती है, सुन लो करुण पुकार।
जीवन भर तेरी कृपा से, चलता रहा संसार।
कर्म क्षेत्र में व्यस्त रही, आलस ने छुआ नहीं।
जो सौंपा था तूने मुझको, उससे मुख मोड़ा नहीं।
धर्म–कर्तव्य का दीप जला, आँधी आई, थामा हाथ।
हर उलझन में राह दिखाई, बनकर मेरे साथ।
ध्यान में मन को साध लिया, श्वास–श्वास में नाम।
तेरी कृपा से स्वस्थ रही, मिला संतुलित काम।
अब अंतिम पड़ाव समीप है, थकने लगा ये तन।
पर चेतन में जाग रही हूँ, तेरा ही चिंतन।
कर्मरत रहूँ अंत घड़ी तक, यही मेरी चाह।
न टूटे विश्वास कभी भी, न डगमग हो राह।
अंतिम विनती, हे करुणामय, अहंकार हर लेना।
अपने चरणों में स्थान दे, बस इतना वर देना।
जब टूटे यह देह का बंधन, मन तुझमें लीन रहे।
तेरी गोद में शांति मिले, बस यही प्रार्थना मेरी।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार



