साहित्य
सदैव

विचार ऊँचे सदैव रखना ।
सही डगर आज सोच बढ़ना ।।
भला हमेशा हुआ तुम्हारा ।
सदैव ईश्वर यहां पुकारा ।।
मनुज सहारा वहीं मिलेगा ।
दयालु है वह हृदय हिलेगा ।।
भली रहे सोच तारता वह ।
कभी पुकारो कि जानता वह ।।
यहाँ सजाता, तुम्हें विधाता ।
सुने सभी की, पुकार दाता ।।
वही हरेगा, सदा अँधेरा ।
भला करेगा, सदैव तेरा ।।
नीलम अग्रवाल रत्न बैंगलोर
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