
-शिव और सती
भोले के तन भर्ती भस्मी,गले सर्पों का हार है।
सुनता जग की महकाल ,सबका दातासतीर है।।
पहने है बाघम्बर देखो,आसन मृग छाल की।
भोले का सजा हुआ,अनोखा अजब शृंगार है।।
कर में त्रिशूल और डमरू भूतों के रहता संग।
खाते आक धतूरा पीते भंग,देव लाचार है।।
अमृत घट आभूषण सब देवों में बॉंट दिये।
शिव ने जहर पिया यह जाने सब संसार है।।
पिता घर पति काअपमान से सती ने प्राण दिया।
तपस्या पुनः कर पार्वती को शिव उपहार है।
शक्ति संग शिव अर्धनारीश्वर सृष्टि रचलाये।
सती का रूप ही पार्वती का आधार है।।
शिव है शक्ति के स्वामी,ये करुणा की खान।
उषा देखो अपने भोले का, अजब व्यवहार है।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




