साहित्य

दूर के ढोल सुहावने लगते हैं – लोकोक्ति

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

क्यों लगते हैं ढोल दूर के
हमको खूब सुहाने?
दादा जी ऐसा क्या इनमें
लगे जो मन को भावने?

दादा बोले सुंदरता जब
देखी बाहर से जाती,
पर अंदर की कमियाँ हमको
नजर नहीं तब आती।

इसीलिए तो लोग जगत में
कहते सीना ताने,
ढोल दूर के यहां सभी को
लगते बड़े सुहाने।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो० – 84330134099

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