
दर्द अगर बोलता तो अपना हाल ए दिल सुनाता।
अपने दिल की खामोश धड़कनें भी वह सुनाता।।
दर्द अगर बोलता तो अपने छुपे हुए ज़ख्म दिखाता।
कभी गुमसुम ना रहता वो, छुप छुप कर ना रोता।।
खुल कर कहता वो अपने दिल का हर किस्सा।
अपनी तकलीफों को यूं परतों में कभी ना छुपाता।।
होता हमदर्द अगर कोई अपनी हर बात कहता।
कभी भी अकेले में वह अपने आंसु ना बहाता।।
सोनी बरनवाल कशिश
जमुई (बिहार)




