
माता गौरी सती व्यंजना मेहर करो माँ सिद्धिदात्री
रक्तबीज का संहार करती माँ कालरात्रि
अष्टभुजी दुर्गा माता बरसा दो अपनी कृपा
आदिशक्ति कहे या चामुंडा आनंद स्वरूपा
रणचंडी शक्ति रौद्र-रूपा कात्यानी महाकाली
मातृत्व रूप में विराजे शेरों की करती सवारी
निर्गुण सगुण साकार निराकार माँ रुद्राणी
नवरात्रि के पर्व पर कई रूपों में मानते ब्रह्माणी
जय ज्वाला पर्वत वासिनी कहलाती पहाड़ों वाली
महादेवी भगवती पराशक्ति दुर्गा महाकाली
जन-जन में महिमा जगाती माँ त्रिपुरा सुंदरी
आदिशक्ति अनुपम दिव्य स्वरूप माँ भुवनेश्वरी
दुर्लभ माँ दुर्गेश्वरी दुर्गम्या कल्याण माँ कीजिए
दुर्गा तु निवारणी परमेश्वरी संज्ञान माँ दीजिए
तुम्हारे चरणों में लगाकर हाजिरी करते हैं वंदन
झोली भरो हमारी करते हैं बार-बार अभिनंदन
कविता नामदेव नजीबाबाद बिजनौर (उ.प्र)



