साहित्य

खो बैठे बचपन हम

रिया राणावत

खेलों को भूल भुलाकर,
ले बैठे मोबाइल फोन हम।

खेलों को भूल भुलाकर
ले बैठे मोबाइल फोन हम।

ना चाहते हुए भी ,
खो बैठे बचपन हम।
स्नैप, इंस्टा को ,
बना लिया परिवार अब।
दोस्त रह गए ,
मोबाइल के अंदर।
काटने लगी ,
खुली छत।

खेलों को भूल भुलाकर,
ले बैठे मोबाइल फोन हम।

– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्य प्रदेश)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!