साहित्य

कन्या पूजन

मधु वशिष्ठ

नवमी को पूजन करने बैठी कन्या रूप में आई मेरी मां।

कोमल सा रूप गले में पुष्पों की माला।
लाल चुनरी में आई मेरी मां।

मैया तुझको मैं चंवर ढुलाऊं।
पग धोऊं और तिलक लगाऊं।

पहनाऊं चूड़ियां मैं वारि वारि जाऊं।
सुंदर से आसन पर मां तुम्हें बिठाऊं। कंजक का धर कर रूप खुशियां बनकर आईं मेरी मां।

मेहँदी लगाऊं मैया, ज्योत जगाऊं मैया,
हलवा पूरी का भोग लगाऊं मैया।
सौम्य रूप मैया धर आई मृदुल मुस्कान उनके मुख पर छाई।
वरदायित्री ने वर दीना।
खुशियों से भर गया घर का कोना कोना। पहनकर मैया मैया लाल चुनरिया मुरादें पूरी करीना को घर आई मेरी मां

मैया ऐसे ही हर साल सबके घर तुम आना।
शंभाग्य को सबके मैया ऐसे ही जगाना।

संसार को मैया भय मुक्त बनाना।
सुख शांति सबके घर होवे।

रोग विकार शोक दूर होवें।
नवमी का पूजन करने बैठी कन्या रूप में आई मेरी मां

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!