साहित्य

खिलौना

राजीव त्रिपाठी

दिल कितने हादसों से गुज़रा है
मालूम नहीं अपना हिस्सा है!!
कोई कहता है दीवाना मुझे
हर एक दिल में ख़ुदा रहता है!!
हमको उसने बहुत रुलाया है
यह भी अपना एक किस्सा है!!
वह दग़ा करके मुकर जाता है
इन्सान कितना स्वार्थी होता है!!
दुनिया में तरह-तरह के लोग हैं
हर एक दिल तन्हा होता है!!
बे-ख़याली में ग़लत काम होते हैं
हर इन्सान बेबस होता है!!
तुम ठुकरा दो मुझे मलाल नहीं
अपना अपना नज़रिया होता है!!
दिलों को जीत लो ख़ुशी से
रोने का अंजाम बुरा होता है!!
तड़पते रहते हैं उनकी याद में
ख़ुश-मिज़ाजी तो एक धोखा है!!
देखें नहीं जाते उनके बदले तेवर
लगता है आदमी एक खिलौना है…!

– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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