
मैं, तुम और चाय की गुफ़्तगू,
ठंडी हवाओं में गर्म खुशबू।
निगाहें मिलीं, दिल धड़क उठा,
चाय के संग मोहब्बत का रंग महक उठा।
तेरी बातों की वो मीठी गुफ़्तगू,
चाय के हर घूंट में मिली आरज़ू।
जज़्बात उमड़े, खामोशी मुस्काई,
मोहब्बत की बारिश हर कोने में छाई।
लबों पर हंसी, आँखों में नूर,
दिल के अरमान हुए बेकसूर।
वो तेरी बातों का नरम एहसास,
जैसे चाय में घुली चीनी की मिठास।
चाय की भाप में तस्वीर उभरी,
तुम्हारी मुस्कान जैसे चांदनी बिखरी।
मैं, तुम और चाय का ये सिलसिला,
ज़िन्दगी भर रहे, बस यही दिल की दुआ।
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




