साहित्य

मोहब्बत

राजीव त्रिपाठी

अनछुआ एहसास है
मोहब्बत
हमारे लिए बहुत ख़ास है
मोहब्बत!!
मोहब्बत अगर ना हो तो
दुनिया कड़वी लगती है!!
एक उम्मीद है मीठे दर्द का,
आभास है मोहब्बत!!
रौनक जहान भर की है
तन्हाई का नाम है मोहब्बत!!
मिलन का एहसास मोहब्बत नहीं
जुदाई में भी बनती अलफ़ाज़ है
मोहब्बत!!
दिल के ना जाने कितने टुकड़े हैं
फिर भी बिंदास है मोहब्बत!!
मोहब्बत दर्द भी है सुकून भी
फिर भी नागवार है मोहब्बत!!
तड़प ऐसी की उफ़ तक ना निकले
ख़ामोशी में दबी ज़बान है,
मोहब्बत!!
मोहब्बत जहान में किसको नहीं है
सारी कायनात है मोहब्बत!!
जिसने एक बार पढ़ लिया इसको
गीता और कुरान है मोहब्बत…!!

स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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