साहित्य

अटल जी: अटल रहे

हरमिंदर कौर

जन्म तुम्हारा 25 दिसंबर
सन तुम्हारा 1924 है।
धन्य हुए पिता तुम्हारे
माता की तुम संतान निराले।।

सादी कद- काठी से भरपूर
सादगी से भरे मित्र तुम्हारे।
सादा जीवन उच्च- विचार
तभी तो अटल रहे निर्णय तुम्हारे।।

साहित्य हो या देश का भार
रही महिमा तुम्हारी अपरंपार।
जब- जब तुमने काम किया
देश का ऊंचा नाम किया।।

माथे पर लगाकर सच्चाई की धूल
देश में खिलाया कमल का फूल।
देश की महकती हस्ती हो तुम
अद्भुत क्षमता के वासी हो तुम।।

लोहा सब ने तुम्हारा माना कारगिल युद्ध हो या संयुक्त राष्ट्र।
परमाणु परीक्षण हो या विपक्ष की बैठक
सब में तुमने मान बढ़ाया।।

तुम सा ओजस्वी तुम सी वाणी
सुनकर भारत गौरव से मुस्कुराया।
विश्व पटल पर गौरवान्वित
भारत वर्ष को तुमने करके दिखाया।।

तुम एक नेता ही नहीं
कवि भी महान थे।
चुन- चुन कर शब्दों से
करते सब पर प्रहार थे।।

जितना तुमको जिसने जाना
सच को उसने उतना पहचाना।
तुमसे पढ़ा जिसने राजनीति का पाठ
उसने उतना देश का भविष्य संवारा।।

हरमिंदर कौर, अमरोहा (यूपी)

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