साहित्य

नन्ही चिड़िया

शशि कांत श्रीवास्तव

वो नन्ही सी चिड़िया
दबाकर तिनका चोंच में
ढूंढ रही है एक ठिकाना
अपनी इन सूनी आँखों से
बनाने को इक नीण सघन
वो नन्ही सी चिड़िया ,
नहीं मिला कहीं कोई ठिकाना
उस नन्ही सी चिड़िया को
थक कर बैठ गई वो चिड़िया
दबा कर तिनका चोंच में अपने
वो नन्ही सी चिड़िया , ||

शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली ,पंजाब
©स्वरचित मौलिक रचना
29-05-2020

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