
कविता अंतर्मन की मधुर पुकार है,
भावों का सागर, शब्दों का विस्तार है।
कभी हँसी की धूप, कभी अश्रु की धार,
कविता जीवन का सच्चा उद्गार है।
मन की पीड़ा को जब शब्द मिल जाते हैं,
सूखे अधरों पर भी गीत खिल जाते हैं।
अंतर की ज्वाला जब कागज़ पर उतरती,
पत्थर दिलों में भी भाव जग जाते हैं।
कवि वही जो सच का दीप जलाता है,
अंधेरों में भी राह दिखाता जाता है।
न झुकता अन्याय के आगे कभी,
कलम से समाज को सजाता है।
कविता केवल कल्पना का जाल नहीं,
यह जन-जन की पीड़ा का सवाल सही।
देश, धर्म, मानवता का मान बढ़ाए,
ऐसी रचना ही कवि का कमाल सही।
जब भी लिखो तो सत्य की राह चुनो,
जनहित में अपने शब्दों को तुम बुनो।
कलम की शक्ति से जग को जगमगाओ,
वतन के लिए हर पंक्ति में प्राण भरो।
कविता है चेतना, कविता ही प्रकाश,
इससे ही खिलता है मानव विश्वास।
विश्व कविता दिवस पर यही संदेश—
शब्दों से रचो तुम सुंदर इतिहास।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




