
तेरी आँचल जब जब हवा में लहराई
आसमान में बदरा तब तब है छाई
फिजां का बदल गया रंग व नजारा
तेरी काली जुल्फों का ये काम है सारा
तेरी ये अल्हड़ चाल तेरी ये ढंग मस्तानी
नागिन सी बयां कर रही है तेरी कहानी
रूत वो प्यार की इस धरा पे है आई
जब जब तेरे बदन को छु गुजरी पुरवाई
तेरी पैरों की पायल की ये बजती रूनझुन
जवां दिलों की धड़का जाती है धड़कन
तेरी कजरारी नैनों की ये तेज कटार
घायल कर जाती है जिगर को मेरे यार
बागों की ये कलियां गुमसुम क्यूँ है भाई
लगता है तेरे सुन्दरता देख शर्म से शरमाई
हर गुलशन की तुम हो एक गुलफाम
हर जवां दिल की धड़कन हो गई तेरे नाम
मोहब्बत की आई धरा पे ये नई विहान
झूम रहा है प्रीत में सारा ये जवां जहान
प्रेम की मैं भी तुमसे करता हूँ इजहार
खोल दरवाजा कब से खड़ा हूँ मैं तेरे द्वार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




