
नाई ने मेरी दाढ़ी को अंतिम रूप देते समय दुकान में आये एक वरिष्ठ नागरिक को संबोधित किया – “राम-राम सा” ।
“राम-राम” कहते हुए वह वरिष्ठ नागरिक अपने हाथ में पकड़े हुए ठंडे को कुर्सी से टिकाते हुए बैठते ही ठंडी सांस भरने लगे । देखने में उनका स्वास्थ्य ठीक लग रहा था । आँखों पर चश्मा नदारत था । डील-डौल में आयु का प्रभाव झलक रहा था । चेहरे पर झुर्रियां नदारत थीं लेकिन वाँह पर साफ दिखाई दे रही थीं ।
नाई ने दाढ़ी बनाने के बाद मेरे चेहरे पर थोड़ी-सी क्रीम लगाई और तौलिया हटाकर वरिष्ठ नागरिक को संबोधित किया – “आप आइए ।”
मैं कुर्सी से उतर कर अपनी शर्ट को झाड़ने लगा । तभी वरिष्ठ नागरिक बोले – “थोड़ी देर में बैठता हूँ । थोड़ा सुस्ता लूँ ।”
तभी नाई ने पूछ लिया – “अब तो आप 85 के आसपास होंगे !”
यह सुनकर मेरे कान खड़े हो गए और मैंने उनको फिर आयु आँकने की दृष्टि से देखा क्योंकि मैं स्वयं इस समय 72 वसंत देख चुका था। अब मैं मन-ही-मन स्वयं की तुलना उन वरिष्ठ नागरिक से करने लगा । सोच रहा था कि मेरे पैरों में अभी से बहुत दर्द होने लगा है । पैदल चलने पर बहुत थकान होने लगी है । जीने पर पढ़ने पर सांस फूल जाती है। चश्मे के बिना दूर का दिखना बंद हो गया है और बिना चश्मे के पढ़ना बंद हो गया है । और यह महाशय तो चश्मा भी नहीं लगाए हुए हैं। हो सकता है कि नाई की दुकान तक आने के लिए न पहना हो !
तभी वह वरिष्ठ नागरिक कुर्सी से सरक कर उठे और अपने बाल कटवाने के लिए नाई के पास वाली कुर्सी पर हत्थे का सहारा लेकर बैठते हुए बड़े गर्व से बोले – “सौ में आठ वर्ष कम हैं । 92 वर्ष का हो गया हूँ ।”
इतना सुनते ही मैं उन वरिष्ठ नागरिक के मुँह को देखता रहा गया और सोचने लगा कि आधुनिक युग में 92 का आंकड़ा छूना आसान नहीं है । मैं शायद ही इस आंकड़े को छू पाऊँ ! वह अकेले ही नाई की दुकान पर चले आये ।
इतने में नाई ने वरिष्ठ नागरिक के बाल काटने के लिए गले में कपड़ा बांँध दिया और कंघा-कैंची उठाया ही था कि वरिष्ठ नागरिक बोले – “इससे नहीं। सिर पर उस्तरा लगाओ ।”
नाई ने उनके कथनानुसार वरिष्ठ नागरिक के बाल उस्तरे से साफ कर दिए ।
मैंने नाई को अपनी दाढ़ी बनाने के ₹ दिये और फिर कुर्सी पर बैठ कर उन महाशय की गतिविधियों को देखने लगा ।
वरिष्ठ नागरिक ने अपने सिर पर एक बार हाथ फेरा और बोले – “कान के नीचे गर्दन के ऊपर कुछ बाल-से लग रहे हैं। यह साफ नहीं हुए ?”
नाई ने भी छूकर देखा और बताया कि बाल बिल्कुल भी नहीं हैं । आपको ऐसा लग रहा होगा ।
तभी मुझे याद आया कि मैं इस आयु में कुछ-कुछ भूलने लगा हूँ । कभी-कभी कुछ शब्द या आकृति दिमाग में घूमती रहती है पर उनका नाम तत्काल याद नहीं आता । लेकिन इन्हें तो भ्रम हो रहा है!
वरिष्ठ नागरिक ने अपनी जेब से ₹ निकाले और देने योग्य राशि गिनकर नाई को दे दी । मैं सोचने लगा कि ₹-पैसे के मामले में हर किसी का दिमाग हर आयु में सही काम करता है!
वह वरिष्ठ नागरिक अपना डंडा उठाकर दुकान से उतर कर धीरे-धीरे अपने घर की ओर चल दिए ।
मैंने नाई से कहा- इस युग में आदमी अधिकतम 80 वर्ष पकड़ ले , वह ही बहुत है । मैं 72 वर्ष का हो चुका हूँ लेकिन मुझे अपने अंदर बहुत -सी कमियांँ दिखने लगी हैं । और यह महाशय हैं कि इस आयु में भी अकेले ही डंडे के सहारे बाजार में घूम रहे हैं ।
नाई ने कहा- “साहब इन्होंने शुद्ध खान-पान किया है । किसी नशे को हाथ नहीं लगाया। मैं जानता हूँ । आजकल सब चीज में मिलावट है । कोई चीज शुद्ध नहीं । हम स्वास्थ्य के लिए नहीं, पेट भरने के लिए खा रहे हैं ।”
नाई ने मेरी ओर देखते हुए कहा -“जैसी आप अपनी उम्र बता रहे हैं, अब के युवकों का इस उम्र तक पकड़ना भी कठिन होता जा रहा है । जबकि आप अपने बुढ़ापे में उनके बुढ़ापे की कल्पना कर रहे हैं ।”
मैंने नाई की हाँ-में-हाँ मिलाई और मैं 92 का आंकड़ा छूने की कल्पना करता हुआ जैसे ही दुकान से चला तो मेरे कानों में आवाज आई – “राम-राम सा” ।
मैंने मुड़कर नाई की ओर मुस्करा कर देखा और हाथ जोड़कर चल दिया ।
*-राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक:- 18-03-2026 बुधवार




