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हर रोज नया सूरज नई सुबह मिलती है।
नए विश्वास नईआस की कली रोज खिलती है।।
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जानलो कि मेहनत का फल जरूर मिलता है।
आज गर न मिला तो कल जरूर मिलता है।।
हर सुबह फिर एक नई सी किरण मिलती है।
हर रोज नया सूरज नई सुबह मिलती है।।
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जो मंजिल न मिल जाए परिश्रम थकता नहीं है।
वही तो असली संघर्ष जो कभी रुकता नहीं है।।
हर दिन हौसलों की एक नई दवा मिलती है।
हर रोज नया सूरज नई सुबह मिलती है।।
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कोई समस्या ऐसी नहीं जिसका समाधान नहीं है।
फिरभी कोशिश आशा बिन मिलता निदान नहीं है।।
जब तक मन से हार न माने गाड़ी जरूर चलती है।
हर रोज नया सूरज नई सुबह मिलती है।।
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रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।




