
सबर का मेरे अभी ,
इम्तेहान जारी हैं ।
वक्त वो भी आयेगा
जब खुदा खुद ,
कहेगा चल अब तेरी बारी हैं।
इतना तोड़ कर अब तू भी नहीं जाएगा,
दिल जला कर तू किया अब मुझे तड़पाएगा।
डरा मत तू अब यू,
तेरे ना होने पर, कौन मुझे चुप कराएगा।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्य प्रदेश)




